चंदा की चुदाई 2 (Chanda ki Chudai Part 2)

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Chanda Ki Chudai Part 1

अगले दिन स्कूल में चंदा सुबह से ही घबराई हुई थी। उसकी रात ठीक से नींद नहीं आई थी, क्योंकि विजय सर की बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं। वो जानती थी कि सर की नजरें उसके भरे हुए जिस्म पर टिकी रहती हैं, और अब वो फंस चुकी है। चंदा ने आज भी वही स्कूल यूनिफॉर्म पहनी थी – सफेद शर्ट जो उसके B00bs को मुश्किल से छिपा पा रही थी, और घुटनों तक की स्कर्ट जो उसकी नरम जांघों को हल्का-हल्का दिखा रही थी। उसके बाल खुले थे, और चेहरा मासूमियत से भरा हुआ, लेकिन अंदर से वो डर रही थी।







क्लास खत्म होने के बाद, लंच का समय आया। विजय सर ने क्लास में सबको देखा, लेकिन उनकी नजरें चंदा पर ज्यादा रुकीं। वो मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो। लंच के बाद, चंदा धीरे-धीरे सर के केबिन की तरफ चली। उसके दिल की धड़कन तेज थी, हाथ ठंडे पड़ रहे थे। वो सोच रही थी, "क्या होगा आज? सर क्या करेंगे?" लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं था; अगर पैरेंट्स को पता चला तो घर में हंगामा हो जाएगा।

केबिन के दरवाजे पर पहुंचकर चंदा ने हल्के से नॉक किया। "सर, मैं आ जाऊं?"

विजय सर अंदर से मुस्कुराते हुए बोले, "हां चंदा, आओ... दरवाजा बंद करके आओ।" उनकी आवाज में एक अजीब सी उत्सुकता थी, जैसे वो कई दिनों से इस पल का इंतजार कर रहे हों। चंदा अंदर आई, दरवाजा बंद किया, और सर के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। लेकिन विजय सर ने कहा, "नहीं, इधर मेरे पास आकर बैठो, टेबल के बगल में।" चंदा हिचकिचाई, लेकिन मान गई। वो सर की कुर्सी के बिल्कुल पास आकर खड़ी हो गई, फिर धीरे से बैठ गई। सर की आंखें उसके B00bs पर टिकी थीं, जो शर्ट के बटनों के बीच से थोड़ा उभरे हुए दिख रहे थे।

विजय सर ने अपनी कुर्सी थोड़ी पीछे खिसकाई और चंदा की तरफ मुड़े। "तो चंदा, कल की बात याद है न? रोज आना है। आज से शुरू करते हैं।" उन्होंने अपना हाथ धीरे से चंदा की जांघ पर रख दिया, ठीक वैसे ही जैसे कल रखा था। चंदा का शरीर सिहर उठा, लेकिन वो चुप रही। सर का हाथ नरम था, लेकिन उसकी उंगलियां धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरक रही थीं। "तुम्हारी इंग्लिश सुधारनी है, लेकिन पहले तुम्हें रिलैक्स होना सीखना होगा," सर बोले, उनकी सांसें गर्म हो रही थीं।

चंदा ने डरते हुए कहा, "सर, प्लीज... मैं कोशिश करूंगी। लेकिन ये... ये क्या?" उसकी आवाज कांप रही थी। विजय सर हंसे, "शशश... चुप। ये तुम्हारी शर्त है। अगर नहीं मानोगी, तो पैरेंट्स को बुलाना पड़ेगा।" उनका हाथ अब चंदा की स्कर्ट के अंदर सरक गया था, और वो उसकी नरम त्वचा को सहला रहे थे। चंदा की आंखें बंद हो गईं, वो सोच रही थी कि ये सब गलत है, लेकिन उसके शरीर में एक अजीब सी सनसनी फैल रही थी। सर की उंगलियां धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रही थीं, जहां उसकी Ch00t छिपी हुई थी। वो हल्के से छू रहे थे, जैसे कोई नाजुक फूल को सहला रहा हो। चंदा की सांसें तेज हो गईं, उसके B00bs ऊपर-नीचे हो रहे थे।

विजय सर अब और करीब आ गए। उन्होंने अपना दूसरा हाथ चंदा की शर्ट पर रखा और धीरे से एक बटन खोला। "देखो चंदा, तुम्हारा जिस्म कितना सुंदर है। ये B00bs कितने रसीले लग रहे हैं," सर ने फुसफुसाते हुए कहा। चंदा ने विरोध करने की कोशिश की, "सर, नहीं... प्लीज," लेकिन सर ने अपना हाथ नहीं हटाया। उन्होंने शर्ट के दो और बटन खोले, और अब चंदा के B00bs ब्रा के ऊपर से साफ दिख रहे थे। सर ने ब्रा को थोड़ा नीचे सरकाया और एक B00bs को धीरे से दबाया। वो इतने नरम थे, जैसे ताजे फल। सर की उंगलियां nippal पर घूम रही थीं, जो सख्त हो रहा था। चंदा की मुंह से एक हल्की सी सिसकारी निकली, वो खुद को रोक नहीं पा रही थी।

अब सर का हाथ स्कर्ट के अंदर और गहराई में जा रहा था। उन्होंने चंदा की पैंटी को साइड से सरकाया और उसकी Ch00t को छुआ। वो गर्म और नम थी, जैसे कोई गहरा कुंआ जिसमें पानी भरा हो। सर की उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थी, हर हरकत में चंदा का शरीर कांप रहा था। "चंदा, तुम्हें मजा आ रहा है न?" सर ने पूछा, उनकी आंखें चमक रही थीं। चंदा कुछ नहीं बोली, लेकिन उसके चेहरे पर लाली छा गई थी। सर ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना L@nd बाहर निकाला। वो लंबा और मोटा था, जैसे कोई ताजा सब्जी जो उगकर तैयार हो गई हो। "देखो चंदा, ये तुम्हारे लिए है। छूओ इसे," सर ने कहा।

चंदा ने डरते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया। L@nd गर्म था, और वो धड़क रहा था। सर ने चंदा का हाथ पकड़कर उसे ऊपर-नीचे करवाया, धीरे-धीरे। चंदा की आंखें बड़ी हो गईं, वो कभी ऐसा कुछ नहीं देखी थी। सर अब और उतावले हो रहे थे। उन्होंने चंदा को खड़ा किया, उसकी स्कर्ट ऊपर उठाई, और पैंटी नीचे सरका दी। चंदा की Ch00t अब पूरी तरह खुली थी, गुलाबी और नम। सर ने अपना L@nd उसकी Ch00t के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। चंदा को दर्द हुआ, लेकिन साथ में एक अजीब सा मजा भी। सर ने धीरे-धीरे अंदर धकेला, हर इंच में चंदा की सांस रुक रही थी। "आह... सर... धीरे," चंदा ने कहा, लेकिन सर अब रुकने वाले नहीं थे।

वे अब जोर-जोर से हिल रहे थे, L@nd Ch00t के अंदर-बाहर हो रहा था। चंदा की जांघें कांप रही थीं, उसके B00bs उछल रहे थे। सर ने एक हाथ से B00bs दबाए, दूसरे से चंदा की कमर पकड़ी। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाजें गूंज रही थीं। आखिरकार, सर का L@nd फूट पड़ा, जैसे कोई जूस निकल रहा हो। चंदा भी थककर गिर पड़ी, लेकिन सर ने उसे सहारा दिया। "अच्छी लड़की, कल फिर आना," सर ने कहा, अपनी पैंट बंद करते हुए। चंदा ने कपड़े ठीक किए, आंसू पोछे, और चुपचाप बाहर चली गई। लेकिन अंदर से वो जानती थी कि ये बस शुरुआत है।


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Chanda Ki Chudai Part 3